जयपुर की महारानी गायत्री देवी की पूरी जीवनी

जयपुर की महारानी गायत्री देवी की पूरी जीवनी

Maharani Gayatri Devi of Jaipur
महारानी गायत्री देवी (लंदन – 1965)

अगर हम इतिहास के मशहूर राजा या रानियों की बात करते हैं तो उनमें से ज्यादातर अपनी वीरता के कारण जाने जाते हैं। लेकिन आज हम एक ऐसी महारानी के बारे में बात करेंगे जो अपनी वीरता से ज्यादा अपनी खूबसूरती तथा राजनीतिक पकड़ के लिए मशहूर थीं। हम बात कर रहे हैं जयपुर की मशहूर महारानी गायत्री देवी की, जिनकी खूबसूरती के चर्चे विश्व भर में थे।

महारानी गायत्री देवी ने राजनीति से ले कर समाज सेवा तक कई क्षेत्रों में काम किया व हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाईं। कुछ क्षेत्रों मे तो महारानी जी को अत्यधिक प्रशिद्धि मिली। ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ के अनुसार महारानी गायत्री देवी का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में 1962 के लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक वोटों से जीत (landslide victory) हासिल करने के लिए दर्ज है।

पोलो से ले कर शिकार तक महारानी गायत्री देवी ऐसी कई और चीजों के लिए जानी जाती थीं।

महारानी गायत्री देवी
पद1940-2009
जन्म23 मई 1919 (लंदन)
मृत्यु29 जुलाई 2009 (उम्र 90 – पेट व फेफड़े सम्बन्धी)
पितामहाराजा जीतेन्द्र नारायण (कूच बिहार)
मातामहारानी इंदिरा देवी (बड़ौदा)
पतिमहाराजा मान सिंह II (जयपुर) (1940 – 1970)
राजघरानाकूच
पुत्रराजकुमार जगत सिंह (इसारदा के राजा)

महारानी गायत्री देवी का जन्म (Birth of Maharani Gayatri Devi)

Gayatri Devi Childhood

जयपुर की राजमाता कही जाने वाली महारानी गायत्री देवी का जन्म 23 मई 1919 को लंदन में हुआ था। महारानी गायत्री देवी के पिता राजकुमार जितेंद्र नारायण, कुच बिहार (बंगाल) के युवराज के छोटे भाई थे और वही उनकी माँ इंदिरा राजे बड़ौदा के मराठा राजा महाराजा सयाजीराव गायकवाड (तृतीया) की इकलौती बेटी थी।

राजमाता गायत्री देवी का सबसे पहला नाम आईशा था। जो उनकी माता महारानी इंदिरा राजे ने रखा था। बाद मे महारानी इंदिरा के एक मित्र ने जब उनको बताया की आईशा एक मुस्लिम नाम है तो उनका नाम गायत्री देवी रखा गया। इसके बाद भी परिवार व आपसी सम्बन्धी उनको प्यार से आईशा ही बुलाते थे।


महारानी गायत्री देवी की शिक्षा तथा निजी जीवन (Education & Early Life of Maharani Gayatri Devi)

महारानी गायत्री देवी की शुरुआती पढ़ाई लंदन के ग्लेंडोवर प्रिपेटरी स्कूल (Glendower Preparatory School) में हुई थी। फिर विश्व भारती यूनिवर्सिटी, शांतिनिकेतन, उसके बाद लॉसेन, स्विट्ज़रलैंड (Lausanne, Switzerland) में और फिर उन्होंने लंदन कॉलेज ऑफ़ सेक्रेटरीज (London College of Secretaries) से सचिवीय कौशल की पढाई की।

Gayatri Devi after a polo match

गायत्री देवी के बारे में यह कहा जाता है कि वह एक बहुत ही बड़े शानदार महल में पली-भड़ी थी और उनके महल में लगभग 500 से ज्यादा नौकर काम करते थे। इसके साथ-साथ गायत्री देवी को गाड़ियों और शिकार का भी बहुत शौक था। उनके बारे में यह भी कहा जाता है की जब उन्होंने पहली बार चीते का शिकार किया तब उनकी उम्र महज 12 वर्ष थी।

महारानी गायत्री देवी एक अच्छी शिकारी के साथ साथ बेहतरीन घुड़सवार और पोलो की अच्छी खिलाड़ी भी थी। उन्हें गाड़ियों का भी बहुत शौक था। आज भी भारत में पहली बार मर्सिडीज W126 और 500SEL लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। इसके अलावा भी उनके पास कई ढेर सारी महंगी गाड़ियों का कलेक्शन था। मर्सिडीज व रोल्स रॉयस जैसी गाड़ियों के साथ-साथ महारानी गायत्री देवी के पास एक एयर क्राफ्ट भी था।


महारानी गायत्री देवी का वैवाहिक जीवन एवं जयपुर का राजघराना (Married Life of Maharani Gayatri Devi and the Royal House of Jaipur)

9 मई को वर्ष 1940 में 21 साल की उम्र में सवाई मानसिंह द्वितीय बहादुर (Sawai Man Singh II) के साथ महारानी गायत्री देवी का विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद वह जयपुर की तीसरी महारानी बन गईं। वह मानसिंह से पहली बार पोलो ग्राउंड मे मिली थीं और बताया जाता है कि मानसिंह उन्हें देखते ही उनसे प्यार कर बैठे थे।

Maharani Gayatri Devi & Sawai Man Singh Wedding
1940 में अपनी शादी के दौरान महारानी गायत्री देवी के साथ महाराजा सवाई मान सिंह II

15 अक्टूबर 1949 को महारानी गायत्री देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम राजकुमार जगत सिंह (Jagat Singh) रखा गया। उन्हें वर्ष 1949 में ही जयपुर की राजमाता का भी दर्जा प्राप्त हुआ। आगे जा कर राजकुमार जगत सिंह ने थाईलैंड (Thailand) के युवराज प्रियरंगसित रंगसित और उनकी पत्नी विभावदी रंगसित की पुत्री प्रियनंदना से विवाह किया।

महारानी गायत्री देवी की एक तस्वीर
महारानी गायत्री देवी की एक तस्वीर

राजकुमार गायत्री देवी की जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था फिर अचानक से उनकी जिंदगी में बुरे वक्त की शुरुआत हो गई। 19 जून 1970 को 57 साल की उम्र में उनके पति महाराजा मानसिंह का देहांत हो गया। जिसके बाद वह काफी दुखी रहने लगीं। इसके बाद जब सन् 1997 में उनके इकलौते पुत्र राजकुमार जगत सिंह की लंदन में मृत्यु हो गई। इसके बाद महारानी गायत्री देवी पूरी तरीके से टूट गई।


महारानी गायत्री देवी का राजनितिक जीवन (Political Life of Maharani Gayatri Devi)

भारत की आजादी तथा बंटवारे के बाद अधिकांश रियासतों को भारत में शामिल कर लिया गया जिसके बाद सभी शाशकों से उनकी सत्ता छीन गई। सन् 1962 में महारानी गायत्री देवी ने सी. राजगोपालचारी (C. Rajgopalchari) द्वारा स्थापित स्वतंत्रता पार्टी (Swatantrata Party) में शामिल होकर राजनीति में पहली बार कदम रखा और उसी वर्ष उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़कर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की और अपने क्षेत्र की सांसद बनी।

महारानी गायत्री देवी लोगों से मिलते हुए

वर्ष 1965 में उनकी मुलाकात लाल बहादुर शास्त्री जी से हुई। जिन्होंने उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। उस वक्त उनके पति सवाई मानसिंह द्वितीय स्पेन में भारतीय राजदूत के तौर पर नियुक्त थे लेकिन उन्होंने अपने विचारों तथा आदर्शों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलाया और भैरों सिंह शेखावत की पार्टी जनसंघ के साथ गठबंधन कर लिया। जिसके बाद स्वतंत्र पार्टी और जनसंघ पार्टी के गठबंधन ने वर्ष 1967 के चुनाव में बड़ी ऐतिहासिक जीत हासिल की।

सन् 1971 में भारत सरकार ने सभी रियासतों तथा राजघरानों से उनका टाइटल छीन लिया। तब महारानी गायत्री देवी समेत कई राजा रानियों से उनकी सियासत छिन गई व उनको मिलने वाला सरकारी-भत्ता भी बंद हो गया। इसके बाद जब उसी वर्ष भारत की मौजूदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया तब महारानी गायत्री देवी पर पूर्ण संपत्ति घोषित न करने का आरोप लगाया गया जिसकी वजह से उनको दिल्ली के तिहाड़ जेल में 5 महीने भी गुजारने पड़े थे।

महारानी गायत्री देवी कुल ३ बार संसद की सदस्य रहीं। वर्ष 1976 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और उसी वर्ष उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘ए प्रिंसेस रिमेम्बर्स’ (A Princess Remembers: The Memoirs of the Maharani of Jaipur) छापी। संत रामराव द्वारा इस किताब को लिखा गया था।

सन् 1999 में यह खबर आई थी कि महारानी गायत्री देवी फिर से राजनीति में कदम रखेंगी। जब कूचबिहार की तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा के इलेक्शन में अपना नॉमिनी बनाया था। लेकिन बाद में महारानी गायत्री देवी ने इस ऑफर को मना कर दिया।


महारानी गायत्री देवी के योगदान (Contributions of Maharani Gayatri Devi)

महारानी गायत्री देवी स्कूल, जयपुर
महारानी गायत्री देवी स्कूल, जयपुर

कहा जाता है की जब राजा मान सिंह ने पर्दा प्रथा खत्म करने के लिए महारानी से सुझाव माँगा तो उन्होंने कहा की आप मुझे एक स्कूल खोल कर दें मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी। इसी तरीके से 12 अगस्त 1943 को जयपुर के महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल (Maharani Gayatri Devi Girls School) की शुरुआत हुई जो कि आज भी जयपुर में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में अपना योगदान दे रहा है। इसके अलावा भी महारानी गायत्री देवी ने शिक्षा व समाज सुधार के लिए अनेक कार्य किये जिनके लिए उनको आज भी सराहा जाता है।


महारानी गायत्री देवी की मृत्यु  (Maharani Gayatri Devi Death)

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगायी गयी इमरजेंसी के दौरान जब उन्हें तिहाड़ जेल में सजा काटनी पड़ी थी तब उन्हें जेल मे पेट सम्बन्धी समस्याएँ शुरू हो गयीं। 5 महीने बाद महारानी जी तो जेल से बाहर आ गयीं लेकिन इन शारीरिक समस्याओं ने उनका साथ नहीं छोड़ा। यह धीरे-धीरे बढ़ने लगी जिसके चलते उन्हें लंदन के किंग एडवर्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहाँ पर उनका इलाज चल रहा था। उसी दौरान उन्होंने जयपुर वापस आने की इच्छा ज़ाहिर की थी जिसके बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से जयपुर वापस लाया गया था।

17 जुलाई 2009 को उनको जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल (Santokba Durlabhji Memorial) अस्पताल में फिर से भर्ती कराया गया जिसके बाद लंग फेफड़े की नाकामी (Lung failure) से उनकी मृत्यु 90 साल की उम्र में 29 जुलाई 2009 को हुई।

महारानी गायत्री के बेटे जगत सिंह की मृत्यु के बाद उनकी वसीहत के अनुसार उनकी सारी संपत्ति महारानी गायत्री देवी के पास आ गयी। जगत सिंह की 2 संतान हुईं।

Devraj Singh and Lalitya Kumari
देवराज सिंह और लालित्य कुमारी
  • राजकुमारी लालित्य कुमारी 
  • महाराज देवराज सिंह

महारानी गायत्री देवी की मृत्यु के बाद वह सारी संपत्ति इनके पास आ गयी जो इसका देख रेख कर रहे हैं।

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